काव्यरूप

सकाळी सकाळी 
मनातल्या भावना 
ओतल्या कागदावर 
पसरले शब्द ..

काही अर्थपूर्ण 
बोजड अवघड 
काही निरर्थक 
उनाड उनाड ..

काही आवरले 
काही सावरले 
जरासे साकारले 
जरासे विखुरले ..

वा वा सुंदर
काही प्रकटले 
एकदम भिकार 
काही सटकले ..

अक्षरे तीच 
शब्दही तेच
मागेपुढे रचले 
काहींना पचले ..

वेगळे तन मन 
वेगळ्या भावना 
डोळ्यात अप्रूप  
वेगळे काव्यरूप  ..
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